
यह बातें मौलाना फारूक खान रजवी ने रहमतनगर स्थित हजरत अली बहादुर शाह अलैहिर्रहमा के तीन दिवसीय 109वें उर्स-ए-पाक के मौके पर आयोजित शाने सहाबा व अहले बैत कांफ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि कही।
उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने अपने जीवन में ही अपने सच्चे और अच्छे सहाबा की वह पाक जमात तैयार की जिसके हर व्यक्ति ने पैगंबर-ए-इस्लाम का हर पैगाम पूरी दुनिया में पहुंचाया। दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, इन हालातों में हर कलमा पढ़ने वाले की यह जिम्मेदारी है कि वह पैगंबर-ए-इस्लाम के तौहीद, अमन व मुहब्बत के पैगाम को घर-घर में पहुंचाए।
विशिष्ट अतिथि मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि नमाज, रोजा, जकात, हज इस्लाम धर्म के स्तंभ हैं इनकी हिफाजत करें। हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करें। मुसलमान बेहूदा टीवी सीरियल्स व फिल्में देखने और नाच गाने से दूरी बना लें और मां-बाप, उस्ताद, उलमा किराम, एक दूसरे, पड़ोसियों, रिश्तेदारों का अदब करें।
संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस रजवी ने शिक्षा हासिल करने पर जोर दिया। कहा कि बच्चों को दीनी शिक्षा हर हाल में दिए जाने की व्यवस्था करें। दुनियावी शिक्षा पर भी फोकस करें। बेटी को बचाएं भी और पढ़ाएं भी। हर हाल में महिलाओं का सम्मान करें। स्वच्छता को अपनाएं। पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को अमल में लाएं, जमीन को हरा-भरा और पानी की बचत करें। बेजुबान मख्लूक पशु-पक्षियों पर रहम करें। पड़ोसियों का हक, आम इंसानों और मजदूरों का हक अदा करें। यतीमों, बेसहारा, विधवाओं पर रहम करें। गरीबों को खाना खिलाएं, कपड़ा पहनाएं। मरीजों का हालचाल पूछें उनकी मदद करें। सच बोलें, ईमानदार बनें।
अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व सलामती के दुआ मांगी गई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत कारी सरफुद्दीन मिस्बाही ने की। अध्यक्षता मौलाना अली अहमद ने की। हम्द व नात-ए-पाक हाफिज रहमत अली निजामी, कारी नसीमुल्लाह व कासिद रजा इस्माइली ने पेश की।
कांफ्रेंस में अली गजनफर शाह, अली मुजफ्फर शाह, अली जफर शाह, अली अशहर शाह, मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी, मौलाना महमूद रजा कादरी, आसिफ नूर, समीर अली, अमन, जैद, चिंटू, फैज मुस्तफाइ, सैफी, शोमाइल, आजाद, लारैब, मुजफ्फर हसनैन रूमी, नेहाल अहमद, सैयद नदीम अहमद, शहबाज सिद्दीकी, समीर, मुनाजिर हसन सहित बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।

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