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Fake News और Propeganda के जमाने में असली बात और खरी खबर दब जाती है। आज मेनस्ट्रीम मीडिया में जो बताया जाता है, वह पूरा सच नहीं। अगर आप सत्य जानना चाहते हैं और कड़वी सच्चाई का घूंट पीने को तैयार हैं तो मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। फेक न्यूज से परेशान हैं तो आइए यहां ! मैं बताऊंगा आपको। सच। जिसे बहुत सलीके से मीडिया छुपा देता है। यहां सिर्फ दिल की बात नहीं होगी, हमारी-आपकी, हमसब के मन की बात होगी।

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गोरखपुर : दिग्विजयनाथ पी.जी. कॉलेज गोरखपुर एवं ’साइंस टेक इंस्टीट्यूट, लखनऊ’ के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय ऑनलाइन इंटरनेशनल कांफ्रेंस || EN Daily ||

गोरखपुर : दिग्विजयनाथ पी.जी. कॉलेज गोरखपुर एवं ’साइंस टेक इंस्टीट्यूट, लखनऊ’ के संयुक्त तत्वाधान में 29 से 31 जुलाई तक आयोजित तीन दिवसीय ऑनलाइन इंटरनेशनल कांफ्रेंस के अंतिम दिन मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेद्र कुमार यादव, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ऐंड फैमिली वेल्फेयर अंडर द मिनिस्ट्री ऑफ फैमिली वेल्फेयर, नई दिल्ली ने विषय ’मल्टीडिसिपलिनरी रिसर्च एंड इनोवेशन’ पर बोलते हुए कहा कि आज के ज्ञान-विज्ञान के युग में मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड इनोवेशन (बहुविषयी अनुसंधान और नवाचार) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यह शोध की वह पद्धति है, जिसमें विभिन्न विषयों जैसे विज्ञान, मानविकी, तकनीकी, चिकित्सा, पर्यावरण, समाजशास्त्र आदि को एकीकृत करके जटिल समस्याओं का समाधान खोजा जाता है। एकल विषय की सीमाओं से बाहर निकलकर जब विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ मिलकर शोध करते हैं, तब नई खोजों, उत्पादों और समाधानों का जन्म होता है। उदाहरण के रूप में स्वास्थ्य क्षेत्र में डॉक्टर, इंजीनियर, डेटा वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक मिलकर जब कार्य करते हैं, तब रोबोटिक सर्जरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रोग पहचान प्रणाली या मानसिक स्वास्थ्य सुधार के नवाचार संभव हो पाते हैं।

मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च केवल अकादमिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, उद्योग और नीति निर्माण में भी क्रांतिकारी परिवर्तन लाता है। जलवायु परिवर्तन, वैश्विक महामारी, ऊर्जा संकट जैसे जटिल मुद्दों का समाधान केवल एक विषय की दृष्टि से संभव नहीं है। इन समस्याओं को समझने और हल करने के लिए पारस्परिक सहयोग आवश्यक है। यह सहयोग संस्थानों, शोधकर्ताओं, सरकार और निजी क्षेत्र के बीच भी होना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 भी इस बात पर विशेष बल देती है कि छात्रों को बहुविषयी सोच और अनुसंधान के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे वे नवाचार की दिशा में स्वतंत्र रूप से सोच सकें और समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित कर सकें।

कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. ओम प्रकाश सिंह, प्राचार्य, दिग्विजय नाथ पी.जी. कॉलेज गोरखपुर ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन हेतु आयोजन समिति को बधाई दी। कॉन्फ्रेंस संयोजक प्रो. परीक्षित सिंह, कॉर्डिनेटर आई.क्यू.ए.सी., दिग्विजयनाथ पी.जी. कॉलेज गोरखपुर ने अतिथियों सहित सभी का स्वागत किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस.के. सिंह, महासचिव, साइंस टेक इंस्टीट्यूट, लखनऊ ने किया। इस कार्यक्रम में डॉ. सुशील सिंह, डॉ. प्रत्याशा त्रिपाठी, डॉ नीलम बंसल, डॉ अभिनव श्रीवास्तव सहित महाविद्यालय के शिक्षक डॉ सुभाष चंद्रा, डॉ राम प्रसाद यादव, डॉ पवन पाण्डेय, डॉ सूरज शुक्ला, डॉ मनीष श्रीवास्तव, डॉ दीपक साहनी, डॉ इंद्रेश पाण्डेय, श्री वृजेश विश्वकर्मा, श्री अश्वनी श्रीवास्तव सहित अन्य शिक्षकों सहित कुल 257 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। उक्त कार्यक्रम की जानकारी महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ शैलेश कुमार सिंह ने दी।

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