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गोरखपुर : घासी कटरा स्थित मदरसा आग़ोश-ए- हमीदिया में दस्तार बंदी के बाद खिल उठे हाफ़िज़ों के चेहरे, क़ाबिले मुबारकबाद हैं वह बच्चे जिन्होंने अपने सीने में क़ुरान संजो कर रखा है - महबूब सईद "हरारिस" || EN Daily ||


गोरखपुर : मदरसा मदरसा आग़ोश-ए- हमीदिया तजवीद-उल-क़ुरान, घासी कटरा गोरखपुर में पवित्र क़ुरान को कंठस्थ कर हाफ़िज़ की उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों की दस्तारबंदी के अवसर पर एक विशेष सभा का आयोजन किया गया।

हज़रत मौलाना अबू ज़र अब्दुल रब मदनी क़ासमी ( उस्ताद हदीस एवं तफ़सीर, जामियातुल इरशाद,आज़मगढ़ ) के संरक्षण में पवित्र कुरान कंठस्थ करने वाले 13 हाफ़िज़ों की दस्तारबंदी की गई।

जिन में हाफ़िज़ मुहम्मद अल-फ़हद अली,हाफ़िज़ मुहम्मद अफ्फान ,हाफ़िज़ मुहम्मद अहसन,हाफ़िज़ मुहम्मद ज़ैद, हाफ़िज़ नबी अहमद, हाफ़िज़ मुहम्मद हम्माद, हाफ़िज़ मोहम्मद साक़िब, हाफ़िज़ मोहम्मद हाशिम, हाफ़िज़ मोहम्मद अनसब, हाफ़िज़ मोहम्मद उमर, हाफ़िज़ मोहम्मद ज़ैद, हाफ़िज़ मोहम्मद अल फहद, हाफ़िज़ मोहम्मद अब्दुल्लाह आदि को हाफ़िज़ की उपाधि प्रदान करते हुए उनकी दस्तारबंदी की गई।

जलसे की शुरुआत हाफ़िज़ ने क़ुरान ए पाक की तिलावत से किया। साथ ही मदरसे के सुंदर नातिया कलाम प्रस्तुत किया और कुछ छात्रों ने पवित्र क़ुरआन की शिक्षा पर प्रकाश डाला।

जामियातुल इरशाद,आज़मगढ़ के हदीस एवं तफ़सीर के उस्ताद हज़रत मौलाना अबू ज़र अब्दुल रब मदनी क़ासमी ने अपने संबोधन में कहा कि वास्तव में कुरान के वाहक का काम केवल उसका पाठ करना, पढ़ना, सही ढंग से कंठस्थ करना और उस पर अमल करना ही नहीं है, बल्कि यह कुरान के वाहक की एक बड़ी ज़िम्मेदारी है। कंठस्थ करने वालों को यह सोचना चाहिए कि अल्लाह का पवित्र शब्द उनके सीने में सुरक्षित है।

मदरसा अग़ोश-ए-हमीदिया, घासी कटरा के मुतवल्ली महबूब सईद हारिस ने कहा कि अल्लाह सर्वशक्तिमान की यह हम सभी पर बड़ी कृपा और दया है कि वह हम सभी से धर्म की सेवा का कार्य ले रहा है। महबूब सईद हारिस ने मदरसे के उन विद्यार्थियों को बधाई दी जिन्होंने क़ुरान को अपने सीने में संजोकर रखा है। उन्होंने कहा कि आपका जो भी स्थान हो, आपको अपनी महानता को पहचानना चाहिए और आपके पास शिक्षा रूपी जो अपार धन है, उसका अच्छी तरह उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारा हमेशा से यही प्रयास रहा है कि, मदरसा अग़ोश-ए-हमीदिया, घासी कटरा में मदरसे में छात्रों को धार्मिक अध्ययन के साथ-साथ विज्ञान और कंप्यूटर की औपचारिक शिक्षा भी प्रदान की जाए, और अल्लाह ताला का शुक्र है, हम इसमें काफी हद तक सफल रहे हैं।

हमीदिया मदरसा तजवीद-उल-क़ुरान के नाज़िम और मिल्लत वेलफेयर फाउंडेशन के निदेशक,मुफ्ती मुहम्मद दाऊद क़ासमी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन लोगों को क़ुरान का हाफ़िज़ घोषित किया गया है, अब उनका यह दायित्व है कि वे लोगों के बीच पवित्र कुरान का प्रचार करें और लोगों को पवित्र कुरान की उज्ज्वल शिक्षाओं से अवगत कराएं, क्योंकि केवल इसी पुस्तक के माध्यम से अत्याचार के अंधकार में भटक चुकी सृष्टि को सत्य के मार्ग पर लाया जा सकता है।

हज़रत मुजाहिद हसनैन हबीबी, नक़ीब-ए-अहल-ए-सुन्नत उल जमात फुलरिया, जीटी, सीतामढ़ी ने सभा का संचालन करते कहा कि आज हमारे बहुत से भाई क़ुरान की शिक्षा से दूर हो गए हैं। जिसके कारण असफलता हमारा भाग्य बन रही है। उन्होंने पवित्र कुरान के पाठ और धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने पर ज़ोर दिया और कहा कि मदरसे के वे विद्यार्थी जिन्होंने कुरान को कंठस्थ कर लिया है। वो अब दूसरों तक इसकी शिक्षा को पहुंचाने का कार्य करें।

जलसे में विशेष तौर से मुहम्मद अफ़्राहीम, डॉ ताहिर अली सब्ज़पोश, डॉ अज़ीज़ रिज़वी, काज़ी कलीमुल हक़, मुफ्ती मुतीउर्रहमान क़ासमी, आसिफ़ सईद, इक़बाल अहमद,शाहाब हुसैन, मुहम्मद आरिफ़ ख़ान,शफ़ीक़ अहमद,असरार अहमद, सय्यद वलिउल-इक़बाल, एडवोकेट अब्दुस्सलाम सलाम,मिर्ज़ा सलीम बेग,दबीर अहमद,अहमद फ़्रेज़र,फ़रहान क़ाज़मी,मुहम्मद वासिफ़ अली, मुहम्मद काशिफ़ अली,सरफराज़, रानू,रैय्यान, फ़ुरक़ान,उमैस,रजब अली,इलियास, यूनुस, हमज़ा,मुनीर समेत बड़ी संख्या में शहर के लोग उपस्थित थे।

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