
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां भारतीय शास्त्रीय संगीत के ऐसे महान कलाकार थे, जिन्होंने अपनी साधना और शहनाई की मधुर धुन से देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने शहनाई को केवल एक पारंपरिक वाद्य यंत्र के रूप में नहीं, बल्कि शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी शहनाई की धुन में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत झलक देखने को मिलती थी।
आफताब अहमद ने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत के अमूल्य धरोहर थे। उनकी सादगी, कला के प्रति समर्पण और देश की सांस्कृतिक एकता के लिए उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई की गूंज आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संगीत और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देती रहेगी।
उन्होंने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को श्रद्धांजलि देना केवल एक महान कलाकार को याद करना नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब को सम्मान देना भी है। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग उपस्थित होकर महान संगीत साधक को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। इस मौके पर खालिक अली सोनू, शहाबुद्दीन अली घोषी, विनोद विश्वकर्मा, मोहम्मद नदीम, इमामुद्दीन घोषी, बाबू खान, आमिर अली अंसारी, आफताब अहमद, हिमालय कुमार, अनूप यादव, आदिल उपस्थित रहे!

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