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"व्यक्तित्व" - डॉ खुशबू || EN Daily ||

"व्यक्तित्व"

व्यक्तित्व एक ऐसा शब्द है जो इंसान के अंदरूनी और बाह्य रूप को परिभाषित करता है

व्यक्तित्व ही ऐसा शब्द है जो बाद में उसकी पहचान बनता है यह यूं कहें उसकी पहचान ही व्यक्तित्व से होती है

समाज में प्रत्येक रूपों में कार्य करने व्यक्तित्व हैं जिन्हें हम सामाजिक रूप से डॉक्टर, पुलिस, अधिकारी,नेता मंत्री, पुजारी, विद्यार्थी, सरकारी कर्मचारी आदि

इन सभी का अपना एक अलग व्यक्तित्व है।

लेकिन उनकी पहचान उनके कार्य से है

उदाहरण के तौर पर कोई डॉक्टर साहब यदि मद्यपान करते हैं तो यह उनका व्यक्तित्व है

जबकि उनका कार्य इस बात की इजाजत नहीं देता

कहने का तात्पर्य सीधा है कि इंसान,

इंसान का व्यक्तित्व, व्यक्तिगत निजी और स्वार्थी होता है।

उदाहरण के तौर पर आप प्रत्येक सेक्टर में देख सकते हैं

सामाजिक संरचना में कार्य करने वाले व्यक्ति की अपनी एक अलग सोच है, अलग कार्यशैली है, उसकी कुछ निजी आदतें हैं,

जो वह अपने सामाजिक कार्यों से दूर रखता है।

आप स्वयं परीक्षण करें, देखें और समझे।

क्या समझ में सभी पुलिस अधिकारी ईमानदार हैं

या फिर कौन से ऐसे डॉक्टर हैं जो मद्यपान का निषेध करते हैं।

कौन से वह सरकारी कर्मचारी हैं जो अपने कार्य और पद साथ पूरा न्याय करते हैं?

वर्तमान दौर में आप भली-भांति देख, पढ़, सुन रहे हैं,समझ रहे हैं।

वास्तव में जो परिदृश्य हम लोग देख रहे हैं वह व्यक्तित्व का है एक उदाहरण है या नतीजा है।

और जब आपका व्यक्तित्व कमजोर होता है तो व्यक्ति सर्वप्रथम घर परिवार समाज और देश के लिए पतन का कारण बनता है और बनता जा रहा है।

कहने की जरूरत नहीं है कि आप दैनिक दिनचर्या में इन्हीं व्यक्तित्व का सामना करते हैं और महसूस करते हैं।

हमारे व्यक्तित्व के लिए हमारा परिवेश महत्वपूर्ण है

एक शिशु जब एक परिवार में जन्म लेता है पूरे जीवन पर्यंत भौतिक संसाधनों को जुटाने की चपेट में ही लगा रहता है और यही उसको विरासत में सीखने को भी मिलता है

यहां नैतिक ज्ञान का अभाव है मानवीय मूल्यों से परहेज है
मानवता नगण्य है।

उदाहरण लैंबॉर्गिनी गाड़ी से उतरकर कभी किसी व्यक्ति ने रोड के किनारे किसी पशु या मानव जान की रक्षा नहीं की होगी ।

साधन संपन्न व्यक्ति के लिए व्यक्तित्व महत्वपूर्ण नहीं होता है बल्कि भौतिक संसाधन को वरीयता दी जाती है।

वर्तमान दौर में मानवीय समाज में व्यक्तित्व लगभग नदारद हैं

दया, प्रेम,करुणा,बंधुत्व, सामानता, भाईचारा, संवेदना के लिए स्थान लगभग शून्य है

शायद इसीलिए समाज में नकारात्मकता बहुत आयत मात्रा में उत्पन्न है हो गई है

हमारे देश की सीमा पर लड़ने वाले वीर जवान एक उनका ही व्यक्तित्व सबसे अलग और निराला होता है

डॉ खुशबू "शांतिलेख"
लखनऊ
उत्तर प्रदेश

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